सोऽहम्
सो — साँस भीतर · हम् — साँस बाहर
“वही मैं हूँ।” यह कोई जाप नहीं, आपकी साँस की अपनी आवाज़ है।
रात को मन नहीं रुकता, तो उसे रोकने के लिए कहना काम नहीं करता। उसे पकड़ने के लिए एक चीज़ चाहिए। नीचे नौ मंत्र हैं — अर्थ, कब बोलें और कितनी बार — और सोने से पहले की पाँच मिनट की विधि। शुरू करने के लिए कुछ डाउनलोड करने की ज़रूरत नहीं।
पहले यह कीजिए
पूरा पन्ना पढ़ना ज़रूरी नहीं। पाँच साँस के लिए गोले के साथ चलिए। बड़ा होते समय मन में सो, छोटा होते समय हम्। कुछ बोलना नहीं है।
सोऽहम्शुरू कीजिए
छह सेकंड भीतर और छह सेकंड बाहर — यानी एक मिनट में लगभग पाँच साँस। इतनी धीमी गति पर साँस छोड़ना अपने आप लम्बा हो जाता है, और शरीर वहीं से शांत होना शुरू करता है। दो अक्षर मन को इतना छोटा काम देते हैं कि वह बड़ा काम ढूँढ़ना बंद कर देता है।
तीसरी साँस पर ध्यान भटक जाए तो वह असफलता नहीं है। भटकना देखकर वापस आना ही अभ्यास है — और यही एकमात्र कौशल है।
कारण
मंत्र नींद लाता नहीं। वह ध्यान को एक शांत जगह देता है, और नींद अपने आप आती है।
दिन की कोई बात चौथी बार दोहराई जा रही है।
दिन भर नींद आती रही, लेटते ही आँख खुल गई।
ग्यारह बजे सो गए, तीन बजे मन काम पर लग गया।
नौ मंत्र
एक चुनिए और सात रातें उसी पर रहिए। असर दोहराव से आता है, मंत्र बदलने से नहीं।
सो — साँस भीतर · हम् — साँस बाहर
“वही मैं हूँ।” यह कोई जाप नहीं, आपकी साँस की अपनी आवाज़ है।
ओम् शान्तिः
शान्ति यानी वह सादा ठहराव, जब कुछ भी गलत नहीं लगता।
लम्बा ओ, फिर धीमा म्
सबसे छोटा और सबसे पुराना। याद रखने को कुछ नहीं।
ओम् नमः शिवाय
जो नहीं हिलता, उसे नमन। भीतर सब कुछ हिल रहा हो तब काम आता है।
…नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
दुर्गा सप्तशती का निद्रा-स्तुति श्लोक — नींद को ही देवी का रूप मानकर प्रणाम।
महामृत्युंजय मंत्र
स्वास्थ्य और रक्षा का लम्बा मंत्र। एक बार में समय लेता है।
ओम् नमो भगवते वासुदेवाय
बारह अक्षरों में सौंप देना — आज हल नहीं करना है।
श्री राम जय राम जय जय राम
तेरह अक्षर, भारत में सबसे अधिक दोहराई गई पंक्तियों में से एक।
जो आपको ठहराए
मंत्र का संस्कृत होना ज़रूरी नहीं। “मैं सुरक्षित हूँ।” “कल देख लेंगे।” बचपन की सुनी कोई पंक्ति।
आज रात यह कीजिए
छोटी है, इसलिए दोहराई जाती है। जो विधि गुरुवार तक छूट जाए, वह अच्छी विधि नहीं।
कमरे के दूसरे कोने में, तकिये के पास नहीं। यही वह क़दम है जो लोग छोड़ देते हैं।
हर बार छोड़ना लेने से लम्बा। अभी ध्यान नहीं कर रहे — बस ठहर रहे हैं।
वही जो आपने ऊपर चुना। ध्यान भटके तो बिना कुछ कहे लौट आइए।
अब मंत्र भी छोड़ दीजिए और शरीर को भारी होने दीजिए। नींद कोशिश के बाद के ख़ाली हिस्से में आती है।
घड़ी देखने की जगह 27 बार। माला का चौथाई — ठहरने के लिए काफ़ी, पूरा करने के लिए छोटा।
ऐप क्या करता है
ऊपर की हर बात बिना ऐप के हो सकती है। जो नहीं हो पाता वह है हिसाब — कितनी बार हुआ, ट्रैक फिर से चलाना, और जलती हुई स्क्रीन। ऐप यही हटाता है।
शुरू करना मुफ़्त, कार्ड की ज़रूरत नहीं
एक हफ़्ते बाद भी अच्छा लगे तो
₹99
एक बार का भुगतान। ऑटो-रिन्यूअल नहीं, रद्द करने को कुछ नहीं।
गिनती
रात के लिए सही मात्रा। माला का चौथाई हिस्सा।
यदि मन देर से ठहरता हो।
दिन के अभ्यास के लिए। रात में गिनती खुद जगाए रखने लगती है।
एक बात साफ़ कह देना ज़रूरी है: यह सोने से पहले की एक विधि है, इलाज नहीं। यदि महीनों से नींद नहीं आ रही, या पूरी नींद के बाद भी थकान बनी रहती है, तो एक बार डॉक्टर से बात कीजिए। मंत्र इलाज के साथ चल सकता है, उसकी जगह नहीं।
सवाल
कोई एक “सबसे अच्छा” मंत्र नहीं होता। जिन लोगों का मन ज़्यादा सोचता है उनके लिए सोऽहम् सबसे सरल है, क्योंकि वह साँस के साथ चलता है। तनाव हो तो ॐ शान्तिः, और डर या बेचैनी हो तो ॐ नमः शिवाय। एक चुनिए और कम से कम सात रातें उसी पर रहिए।
जो सबसे छोटा हो। लम्बा मंत्र याद रखने की कोशिश ही जगाए रखती है। ॐ या सोऽहम् लीजिए, आवाज़ लगभग बंद रखिए और साँस छोड़ने को साँस लेने से लम्बा कीजिए।
रात के लिए 27 बार काफ़ी है। 54 भी ठीक है। 108 दिन के अभ्यास के लिए है — रात में गिनती खुद जगाए रखने लगती है। नींद आ जाए तो नौवीं बार पर रुक जाना भी सही है।
हाँ, और लेटने के बाद यही सबसे उपयुक्त है। मानसिक जप को परंपरा में रात के अभ्यास के लिए सबसे अनुकूल माना गया है, और इसमें गले पर ज़ोर भी नहीं पड़ता।
मंत्र से पहले दो मिनट साँस पर दीजिए — चार गिनती भीतर, सात रोकिए, आठ में छोड़िए। शरीर पहले धीमा होता है, फिर मन। उसके बाद मंत्र को कम काम करना पड़ता है।
“या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥” — यह दुर्गा सप्तशती का श्लोक है, जिसमें नींद को ही देवी का रूप मानकर प्रणाम किया जाता है। सोने से पहले 11 या 27 बार।
परंपरा में गायत्री का समय संध्या — सुबह और शाम — माना गया है। कई आचार्य रात में मौन जप को ठीक मानते हैं। यदि परंपरा का पूरा पालन करना हो तो रात के लिए ॐ या ॐ नमः शिवाय चुनिए।
हाँ, बस छोटा रखिए — ॐ या ॐ शान्तिः, ग्यारह या सत्ताईस बार। माता-पिता की अपनी आवाज़ में रिकॉर्ड किया मंत्र बच्चों पर सबसे अच्छा काम करता है।
हो भी सकता है, और ज़रूरी नहीं भी। एक ही ध्वनि को धीरे-धीरे दोहराना ध्यान को शांत करता है — चाहे आप उसके पीछे की परंपरा मानें या न मानें।
नहीं। अपनी आवाज़ में रिकॉर्ड करना, दोहराना और गिनती — सब मुफ़्त है। PRIME में पूरा मंत्र संग्रह, ध्यान संगीत और असीमित अभ्यास मिलता है।
Prefer to read this in English? Mantras for Sleep — 7 night mantras and a 5-minute routine