Mantra Repeater MANTRA REPEATER

नींद आने का मंत्र

रात को मन नहीं रुकता, तो उसे रोकने के लिए कहना काम नहीं करता। उसे पकड़ने के लिए एक चीज़ चाहिए। नीचे नौ मंत्र हैं — अर्थ, कब बोलें और कितनी बार — और सोने से पहले की पाँच मिनट की विधि। शुरू करने के लिए कुछ डाउनलोड करने की ज़रूरत नहीं।

अपडेट: 13 अगस्त 2026 पढ़ने में 9 मिनट पढ़ते-पढ़ते अभ्यास कीजिए
शुरू करना मुफ़्त अपनी आवाज़ में बिना इंटरनेट भी चलता है

पहले यह कीजिए

एक मिनट — सोऽहम्, साँस के साथ

पूरा पन्ना पढ़ना ज़रूरी नहीं। पाँच साँस के लिए गोले के साथ चलिए। बड़ा होते समय मन में सो, छोटा होते समय हम्। कुछ बोलना नहीं है।

सोऽहम्शुरू कीजिए

यही पूरा अभ्यास है

छह सेकंड भीतर और छह सेकंड बाहर — यानी एक मिनट में लगभग पाँच साँस। इतनी धीमी गति पर साँस छोड़ना अपने आप लम्बा हो जाता है, और शरीर वहीं से शांत होना शुरू करता है। दो अक्षर मन को इतना छोटा काम देते हैं कि वह बड़ा काम ढूँढ़ना बंद कर देता है।

तीसरी साँस पर ध्यान भटक जाए तो वह असफलता नहीं है। भटकना देखकर वापस आना ही अभ्यास है — और यही एकमात्र कौशल है।

कारण

रात को नींद क्यों नहीं आती

मंत्र नींद लाता नहीं। वह ध्यान को एक शांत जगह देता है, और नींद अपने आप आती है।

वही सोच, बार-बार

दिन की कोई बात चौथी बार दोहराई जा रही है।

शरीर थका, मन जागा

दिन भर नींद आती रही, लेटते ही आँख खुल गई।

तीन बजे की नींद

ग्यारह बजे सो गए, तीन बजे मन काम पर लग गया।

नौ मंत्र

नींद के लिए कौन सा मंत्र बोलें

एक चुनिए और सात रातें उसी पर रहिए। असर दोहराव से आता है, मंत्र बदलने से नहीं।

1

सोऽहम्

सो — साँस भीतर · हम् — साँस बाहर

“वही मैं हूँ।” यह कोई जाप नहीं, आपकी साँस की अपनी आवाज़ है।

कब बोलें
जब मन एक ही बात बार-बार दोहरा रहा हो।
कितनी बार
108 · साँस के साथ
2

ॐ शान्तिः

ओम् शान्तिः

शान्ति यानी वह सादा ठहराव, जब कुछ भी गलत नहीं लगता।

कब बोलें
जब दिन का तनाव साथ लेकर बिस्तर पर आए हों।
कितनी बार
54 · केवल साँस छोड़ते हुए
3

लम्बा ओ, फिर धीमा म्

सबसे छोटा और सबसे पुराना। याद रखने को कुछ नहीं।

कब बोलें
जब मन नहीं, शरीर बेचैन हो।
कितनी बार
27 · बहुत धीरे
4

ॐ नमः शिवाय

ओम् नमः शिवाय

जो नहीं हिलता, उसे नमन। भीतर सब कुछ हिल रहा हो तब काम आता है।

कब बोलें
जब डर या बेचैनी हो जिसे समझा न पाएँ।
कितनी बार
108 · एक जैसी गति से
5

या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता

…नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

दुर्गा सप्तशती का निद्रा-स्तुति श्लोक — नींद को ही देवी का रूप मानकर प्रणाम।

कब बोलें
जब नींद को अपना अधिकार नहीं, प्रार्थना मानना ठीक लगे।
कितनी बार
11 या 27
6

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे

महामृत्युंजय मंत्र

स्वास्थ्य और रक्षा का लम्बा मंत्र। एक बार में समय लेता है।

कब बोलें
जब बीमारी या किसी अपने की चिंता जगाए रखे।
कितनी बार
27 · यह लम्बा है
7

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

ओम् नमो भगवते वासुदेवाय

बारह अक्षरों में सौंप देना — आज हल नहीं करना है।

कब बोलें
जब कोई बात सुलझाने की जगह छोड़ देना ठीक हो।
कितनी बार
54
8

श्री राम जय राम जय जय राम

श्री राम जय राम जय जय राम

तेरह अक्षर, भारत में सबसे अधिक दोहराई गई पंक्तियों में से एक।

कब बोलें
जब कुछ नया नहीं, जाना-पहचाना चाहिए।
कितनी बार
108 · लय अपने आप बनती है
9

अपने शब्द

जो आपको ठहराए

मंत्र का संस्कृत होना ज़रूरी नहीं। “मैं सुरक्षित हूँ।” “कल देख लेंगे।” बचपन की सुनी कोई पंक्ति।

कब बोलें
जब किसी और की भाषा में कहना सहज न लगे।
कितनी बार
जितनी बार ठीक लगे

आज रात यह कीजिए

सोने से पहले 5 मिनट की विधि

छोटी है, इसलिए दोहराई जाती है। जो विधि गुरुवार तक छूट जाए, वह अच्छी विधि नहीं।

  1. 0 मिनट

    फ़ोन दूर, रोशनी कम

    कमरे के दूसरे कोने में, तकिये के पास नहीं। यही वह क़दम है जो लोग छोड़ देते हैं।

  2. 1 मिनट

    लेटकर तीन धीमी साँस

    हर बार छोड़ना लेने से लम्बा। अभी ध्यान नहीं कर रहे — बस ठहर रहे हैं।

  3. 2–4 मिनट

    एक मंत्र, धीरे, मन में

    वही जो आपने ऊपर चुना। ध्यान भटके तो बिना कुछ कहे लौट आइए।

  4. 5 मिनट

    दोहराना छोड़ दीजिए

    अब मंत्र भी छोड़ दीजिए और शरीर को भारी होने दीजिए। नींद कोशिश के बाद के ख़ाली हिस्से में आती है।

  5. या फिर

    गिनती पसंद हो तो

    घड़ी देखने की जगह 27 बार। माला का चौथाई — ठहरने के लिए काफ़ी, पूरा करने के लिए छोटा।

ऐप क्या करता है

रात को गिनती आप न कीजिए

ऊपर की हर बात बिना ऐप के हो सकती है। जो नहीं हो पाता वह है हिसाब — कितनी बार हुआ, ट्रैक फिर से चलाना, और जलती हुई स्क्रीन। ऐप यही हटाता है।

  • रिकॉर्ड — मंत्र एक बार अपनी आवाज़ में बोलिए। अपनी आवाज़ जितनी जल्दी शांत करती है, किसी और की रिकॉर्डिंग नहीं करती।
  • साँस के साथ — पहले दो मिनट 4·7·8 की गति, फिर मंत्र। शरीर पहले धीमा हो तो मंत्र को कम काम पड़ता है।
  • दोहराव — 27, 54, 108 या पूरी रात। स्क्रीन बंद, बैकग्राउंड में चलता रहेगा, और स्लीप टाइमर अपने आप रोक देगा।
  • सात रातें — जाप, ध्यान और प्राणायाम अलग-अलग दर्ज होते हैं। सुबह देखिए कि दिन जुड़ते जा रहे हैं।

शुरू करना मुफ़्त, कार्ड की ज़रूरत नहीं

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एक बार का भुगतान। ऑटो-रिन्यूअल नहीं, रद्द करने को कुछ नहीं।

  • बिना सीमा जाप — जिन रातों में सबसे ज़्यादा चाहिए, उन्हीं में रुकावट नहीं
  • पूरा मंत्र संग्रह और ध्यान संगीत
  • प्रगति और स्ट्रीक — सात रातों का सिलसिला दिखता है
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गिनती

मंत्र कितनी बार जपें

27 बार

रात के लिए सही मात्रा। माला का चौथाई हिस्सा।

54 बार

यदि मन देर से ठहरता हो।

108 बार

दिन के अभ्यास के लिए। रात में गिनती खुद जगाए रखने लगती है।

एक बात साफ़ कह देना ज़रूरी है: यह सोने से पहले की एक विधि है, इलाज नहीं। यदि महीनों से नींद नहीं आ रही, या पूरी नींद के बाद भी थकान बनी रहती है, तो एक बार डॉक्टर से बात कीजिए। मंत्र इलाज के साथ चल सकता है, उसकी जगह नहीं।

सवाल

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सोने से पहले कौन सा मंत्र बोलना चाहिए?

कोई एक “सबसे अच्छा” मंत्र नहीं होता। जिन लोगों का मन ज़्यादा सोचता है उनके लिए सोऽहम् सबसे सरल है, क्योंकि वह साँस के साथ चलता है। तनाव हो तो ॐ शान्तिः, और डर या बेचैनी हो तो ॐ नमः शिवाय। एक चुनिए और कम से कम सात रातें उसी पर रहिए।

नींद न आए तो कौन सा मंत्र बोलें?

जो सबसे छोटा हो। लम्बा मंत्र याद रखने की कोशिश ही जगाए रखती है। ॐ या सोऽहम् लीजिए, आवाज़ लगभग बंद रखिए और साँस छोड़ने को साँस लेने से लम्बा कीजिए।

मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?

रात के लिए 27 बार काफ़ी है। 54 भी ठीक है। 108 दिन के अभ्यास के लिए है — रात में गिनती खुद जगाए रखने लगती है। नींद आ जाए तो नौवीं बार पर रुक जाना भी सही है।

क्या मन में मंत्र जप सकते हैं?

हाँ, और लेटने के बाद यही सबसे उपयुक्त है। मानसिक जप को परंपरा में रात के अभ्यास के लिए सबसे अनुकूल माना गया है, और इसमें गले पर ज़ोर भी नहीं पड़ता।

जल्दी नींद आने के लिए क्या करें?

मंत्र से पहले दो मिनट साँस पर दीजिए — चार गिनती भीतर, सात रोकिए, आठ में छोड़िए। शरीर पहले धीमा होता है, फिर मन। उसके बाद मंत्र को कम काम करना पड़ता है।

निद्रा देवी मंत्र क्या है?

“या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥” — यह दुर्गा सप्तशती का श्लोक है, जिसमें नींद को ही देवी का रूप मानकर प्रणाम किया जाता है। सोने से पहले 11 या 27 बार।

क्या गायत्री मंत्र रात को जप सकते हैं?

परंपरा में गायत्री का समय संध्या — सुबह और शाम — माना गया है। कई आचार्य रात में मौन जप को ठीक मानते हैं। यदि परंपरा का पूरा पालन करना हो तो रात के लिए ॐ या ॐ नमः शिवाय चुनिए।

क्या बच्चों के लिए मंत्र ठीक है?

हाँ, बस छोटा रखिए — ॐ या ॐ शान्तिः, ग्यारह या सत्ताईस बार। माता-पिता की अपनी आवाज़ में रिकॉर्ड किया मंत्र बच्चों पर सबसे अच्छा काम करता है।

क्या यह धार्मिक है?

हो भी सकता है, और ज़रूरी नहीं भी। एक ही ध्वनि को धीरे-धीरे दोहराना ध्यान को शांत करता है — चाहे आप उसके पीछे की परंपरा मानें या न मानें।

क्या इसके लिए पैसे देने पड़ते हैं?

नहीं। अपनी आवाज़ में रिकॉर्ड करना, दोहराना और गिनती — सब मुफ़्त है। PRIME में पूरा मंत्र संग्रह, ध्यान संगीत और असीमित अभ्यास मिलता है।

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